➤ आफ्टरमार्केट तेज एलईडी और लाइट बार लगाने पर पुलिस काट सकती है चालान
➤ चकाचौंध वाली लाइट हटवाने के साथ गंभीर मामले में वाहन डिटेन हो सकता है
➤ बार-बार या गंभीर उल्लंघन पर आरसी रद्द करने की संस्तुति संभव
शिमला। हिमाचल प्रदेश में वाहन चालकों को अपनी गाड़ियों में तेज और चकाचौंध पैदा करने वाली आफ्टरमार्केट एलईडी, लाइट बार या अतिरिक्त लाइटें लगाना भारी पड़ सकता है। सड़क पर सामने से आने वाले वाहन चालकों की आंखों पर सीधी और अत्यधिक तेज रोशनी पड़ने से हादसे का खतरा बढ़ रहा है। इसे देखते हुए पुलिस ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। कार्रवाई केवल चालान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वाहन में लगाई गई अनधिकृत लाइट को मौके पर ही हटवाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
पुलिस जांच के दौरान यदि किसी वाहन में अवैध मॉडिफिकेशन या ऐसी अत्यधिक तेज रोशनी वाली लाइट पाई जाती है, जिससे दूसरे वाहन चालकों को परेशानी या खतरा हो रहा हो, तो चालक का चालान किया जा सकता है। गंभीर मामलों में वाहन को डिटेन करने की कार्रवाई भी हो सकती है। इसके बाद मामले की रिपोर्ट परिवहन विभाग को भेजी जा सकती है और नियमानुसार वाहन के पंजीकरण प्रमाणपत्र यानी आरसी पर कार्रवाई करने की संस्तुति की जा सकती है।
दरअसल, नई कार या बाइक खरीदने के बाद कई वाहन मालिक कंपनी की ओर से दी गई मूल हेडलाइट को बदलकर ज्यादा रोशनी देने वाली एलईडी लगवा रहे हैं। कुछ लोग वाहन के आगे अतिरिक्त लाइट बार या दूसरी शक्तिशाली लाइटें भी लगवा लेते हैं। रात के समय इनकी रोशनी सामने से आने वाले चालक की आंखों पर पड़ती है तो कुछ सेकंड के लिए उसे सड़क और सामने चल रहे वाहन की स्थिति साफ दिखाई नहीं देती। पहाड़ी क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
हिमाचल की पहाड़ी सड़कों पर पहले से ही कई जगह सड़क की चौड़ाई कम है और तीखे मोड़ लगातार आते हैं। ऐसे स्थानों पर सामने से आ रही गाड़ी की तेज रोशनी चालक की आंखों में पड़ने पर वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है। अचानक ब्रेक लगाने, सड़क से वाहन उतरने या सामने से आ रहे वाहन से टक्कर की स्थिति बन सकती है। यही वजह है कि पुलिस ऐसे लाइट मॉडिफिकेशन को केवल वाहन की सजावट या निजी पसंद का मामला नहीं मान रही, बल्कि इसे सड़क सुरक्षा से जोड़कर देख रही है।
मूल हेडलाइट में बदलाव पर भी कार्रवाई संभव
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 52 निर्माता की ओर से तय मूल विनिर्देशों में अनधिकृत बदलाव को नियंत्रित करती है। ऐसे में वाहन की कंपनी की ओर से निर्धारित व्यवस्था से अलग लाइट लगाने या मूल हेडलाइट असेंबली में बिना अनुमति बदलाव करने पर कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, वाहन निर्माता की ओर से कंपनी फिटेड और स्वीकृत हेडलाइट सामान्य तौर पर अनधिकृत मॉडिफिकेशन की श्रेणी में नहीं आती। परेशानी उस समय होती है जब वाहन की मूल लाइट व्यवस्था में बिना अनुमति बदलाव किया जाता है या ऐसी आफ्टरमार्केट लाइट लगाई जाती है, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।
खास तौर पर ऐसी लाइटें जिनकी रोशनी जरूरत से ज्यादा तेज हो, सामने वाले चालक को चकाचौंध करे या सड़क की बजाय गलत दिशा में रोशनी डाले, दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। इसलिए वाहन मालिकों को अतिरिक्त लाइट लगवाने से पहले उसके नियमों और स्वीकृति की जानकारी लेना जरूरी होगा।
चालान के बाद भी खत्म नहीं होगी कार्रवाई
इस मामले में वाहन मालिकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि सिर्फ चालान भर देने से मामला खत्म नहीं होगा। यदि वाहन में अनधिकृत लाइट लगी मिली तो पुलिस उसे हटाने के निर्देश भी दे सकती है। यानी वाहन मालिक को गाड़ी में किए गए उस बदलाव को दोबारा मूल और निर्धारित व्यवस्था में लाना होगा।
यदि चालक नियमों का बार-बार उल्लंघन करता है या मामला गंभीर पाया जाता है तो वाहन को डिटेन किया जा सकता है। इसके बाद पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर परिवहन विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है। गंभीर स्थिति में आरसी रद्द करने की संस्तुति भी भेजी जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद वाहन चालकों को परेशान करना या केवल जुर्माना वसूलना नहीं है। मुख्य उद्देश्य रात के समय सड़क पर चलने वाले सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में जहां सड़क, मोड़ और दृश्यता की स्थिति मैदानी इलाकों से अलग होती है, वहां गलत तरीके से इस्तेमाल की गई तेज रोशनी बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।
प्रदेश पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने भी वाहन चालकों से ऐसी लाइटें नहीं लगाने की अपील की है, जिनसे सामने वाले वाहन चालक की सुरक्षा खतरे में पड़े। उनका कहना है कि वाहन चालक अपनी सुविधा के लिए ऐसी रोशनी का इस्तेमाल न करें जो सड़क पर दूसरे लोगों के लिए परेशानी या दुर्घटना का कारण बन जाए।
रात के समय वाहन चलाते हुए हाई बीम और लो बीम का सही इस्तेमाल करना भी बेहद जरूरी है। सामने से वाहन आने पर हाई बीम की रोशनी कम कर लो बीम का इस्तेमाल करने से सामने वाले चालक की आंखों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। पहाड़ी सड़कों पर यह छोटी सी सावधानी भी बड़े हादसे को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है।
ऐसे में यदि किसी वाहन में कंपनी की मूल लाइट के बजाय अतिरिक्त और अत्यधिक तेज एलईडी लगी है तो वाहन मालिकों के लिए समय रहते उसे हटवा लेना बेहतर होगा। पुलिस की कार्रवाई तेज होने की स्थिति में चालान, लाइट हटाने, वाहन डिटेन होने और गंभीर मामलों में आरसी पर कार्रवाई की संस्तुति तक की स्थिति बन सकती है।



